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Wed, 13 Aug 2008 09:48:00

लाल हरा संधि का फैलता आतंक

विकास हलदर अनुसार अनके पास जो अस्त्र थे उससे वे मुझे मार सकते थे पर वे मुझे मारना नही चाहते थे अपितु डरा-धमका के रोकना चाहते थे। लेकिन मै रुकने वालो मे से नही हु मै बंग्लादेशी हिन्दूओ की मदद करता रहुंगा। इसके लिए मेरी जान भी चली जाये तो परवाह नही
बंग्लादेशी हिन्दू

विकास हलदर पिछले कई महीनो से पश्चिम बंगाल की यात्रा कर रहा है। उसके यात्रा का प्रमुख उदेश्य एक करोड़  पचास लाख  लाख बंगलादेशी हिन्दूओ की इस्लामिक कट्टरपंथियो से निजात दिलाना जिसकी सुधी न तो स्थानीय सरकार ले रही है न केन्द्रीय सरकार। हलदर इस को लेकर काफी बेचैन है कि ये हिन्दू बंगलादेशी जिनके पनाह का कोई स्थान निश्चित नही है। ये हिन्दू बंग्लादेशी दिल्ली और कोलकत्ता के बीच त्रिशंकु की तरह झुल रहे है। इसी सिलसिले मे जब वह कोलकत्ता के यात्रा पर थे तब 27 जुलाई को 18 लोगो ने उन पर जानलेवा हमला किया जिसमे हलदर बुरी तरह जख्मी हो गए और फिजिसियन जो उनका इलाज कर रहे है उनके अनुसार जख्म को भरने मे दो हफ्त्ते का समय लगेगा।

हलदर इस जख्मी हालत मे भी कोलकत्ता से उत्तरी दिनजापुर के लिए रवाना हुए, जब उनका बस सुर्यापुर पहुचने वाला था तब  बस मे 18 से ज्यादा लोग सवार हुए और जबरदस्ती हलदर को बाहर निकाला और जमकर पिटाई की। पिटने वालो ने  कुछ नही कहा सब मिलकर पिटने लगे। उनके हाथ मे  छडी, रिवाल्वर, धार वाली चाकू और खतरनाक अस्त्र थे। पिटते हुए कह रहे थे कि यदि तुमने बंग्लादेशी हिन्दूओ को मदद करना बन्द नही किया तो हम तुम्हे जान से मार डालेंगे।  स्थानीय निवासियो ने हलदर को बचाने की कोशिश की हलदर को बचाने वालो मे प्रमुख नाम, संजय और गोलक का लिया जा सकता है। हलदर के अनुसार अनके पास जो अस्त्र थे उससे वे मुझे मार सकते थे पर वे मुझे मारना नही चाहते थे अपितु डरा-धमका के रोकना चाहते थे। लेकिन मै रुकने वालो मे से नही हु मै बंग्लादेशी हिन्दूओ की मदद करता रहुंगा। इसके लिए मेरी जान भी चली जाये तो परवाह नही।  

हलदर अपने उपर हमला होने से दो हफ्त्ते पहले उतरी दिंजापुर की यात्रा की थी वहा पर बलुरबध गाव के रवि शिकारी से उसकी मुलाकात हुई, रवि ने हलदर से वादा किया कि वह यहा पर बंग्लादेशी हिन्दूओ के लिए पनाह स्थल खोलने मे उसकी मदद करेगा। जिले मे शिकारी की बेटी ने कही की वह यहा पर महिला पनाह स्थल खोलने मे उसकी मदद करेगी। हलदर इस विश्वास के साथ घर लौटा कि चलो हमने बंग्लादेशी हिन्दूओ के लिए एक नया पनाह स्थल क जुगाड तो कर लिया। कुछ दिनो बाद दोनो ने हलदर को फोन किया और कहा कि इस मसले पर आप से  मिलकर आगे आगे की योजना  बनाना चाहते है इस लिए आप हम से मिलने हमारे  निवास स्थल पर आये। इसी सिलसिले मे जब हलदर दिंजनापुर जा रहा था तब उस पर यह जानलेवा हमला हुआ। हलदर ने हमलावरो को पहचान भे लिया और कईयो के नाम भी बताये उसमे शेफाली बेन और उसके पति कोयल बेन का नाम प्रमुख है। हलदर के कथनानुसार इन लोगो ने सिर्फ पीटा ही नही अपितु मेरा 8000, रुपया एटीम कार्ड , जरुरी के कागजात सभी छीन लिए।

हलदर पर हमला करने वाले उतरी दिजनापुर के माकपा के कार्यकर्त्ता है, जिनका पश्चिम बंगाल मे शासन है। बहुत सारे स्थानीय हिन्दूओ ने पहचानने मे मदद की  पर भय के मारे सामने आने से डरते है। माकपा का पिछले तीन दशको से यहा पर सत्ता मे है। हलदर को अशंका है कि उस पर यह हमला माकपा और मुस्लिम कट्ट्पंथियो ने मिलकर कराया है। हलदर के अशंका का समर्थन स्थानीय लोगो के बातो से भी हो जाती है । शेफाली और रवि शिकारी अपने जीवन जापन के लिए मोहम्मद मसुद पर निर्भर है।  मसुद का इस्लामिक आतंकवादियो से सम्बन्ध जग जाहिर है। स्थानीय लोगो के अनुसार हाल ही मे पुलिस मसुद के घर से काश्मीरी आतंकवादी को पकड कर ले गई है। बाद मे  उससे छोड दिया गया क्योकि पश्चिम बंगाल की सरकार इस्लामिक कट्ट्पंथियो पर कोई करवाई नही करती है।

शक की सुई हलदर के पुर्व सहयोगी सिपन बसु पर भी जाता है । बसु ने हलदर के साथ मिलकर दो दर्जन से पनाह घरो का दौरा किया था बसु ने 150,000 बंग्लादेशी ट्का जमा किया था ताकि इन बंगलादेशी हिन्दूओ की मदद की जा सके। शक वजह रवि शिकारी सिपन बसु चाचा है और उस पर हत्या और लूट पाट के आरोप भी लगे है।  विकास हलदर मानवाधिकार संस्था इन्टर्फेथ से जुडा है जिसकी स्थापना लेखक महोदय ने खुद की है। संस्था का प्रयास बंग्लादेशी हिन्दूओ पर हो रहे अत्याचार को समाने लाना और जितना बन सके उसकी सहायता का प्रयास करना है। संस्था ने एक और बीडा उटा रखा है माकपा और इस्लामिक कट्टरपंथियो के गटजोड का कैसे भंडा फोड किया जाय।

 


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